बड़ी लापरवाही:परीक्षा की कॉपियां जांचने में हो रही गलतियां, हर साल दस हजार फेल विद्यार्थियों में से 1500 रिअसेसमेंट में पास हो रहे

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बड़ी लापरवाही:परीक्षा की कॉपियां जांचने में हो रही गलतियां, हर साल दस हजार फेल विद्यार्थियों में से 1500 रिअसेसमेंट में पास हो रहे

यूजी और पीजी के छात्रों की कॉपियों में उत्तर छोड़ देना और पूरा नंबर नहीं जोड़ने जैसी गलतियां मिल रहीं

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों में छात्रों की कॉपियां जांचने में बेतहाशा गलतियां की जा रही हैं। इससे हर साल 10 हजार फेल छात्रों को अपनी कॉपियों का रिअसेसमेंट कराना पड़ता है। इनमें से 1500 छात्र पास हो रहे हैं। पिछले पांच साल में इस तरह से लगभग 7500 छात्र पास हो चुके हैं। इनमें ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र शामिल हैं।

यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मुद्दे पर कॉपी जांचने में गलती करने वाले प्रोफेसरों पर कार्रवाई की बात कह रहा है। हर बार रि-चेकिंग में परिणाम बदल जाते हैं। छात्रों का कहना है कि जिन प्रोफेसर की गलतियों से छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

यूनिवर्सिटी में सेमेस्टर के तहत परीक्षा ली जाती है। हर सेमेस्टर में लगभग 2 लाख छात्र होते हैं। परीक्षा परिणाम के बाद लगभग 10 हजार छात्र कॉपियों के मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं होते। ये कॉपी रिचेकिंग के लिए आवेदन करते हैं। रिचेकिंग में नंबर जोड़ने भूल, उत्तरों की जांच नहीं किए जाने जैसी गलतियां सामने आ रही हैं।

एकेडमिक काउंसिल में रखा जाएगा मुद्दा
वीर नर्मद यूनिवर्सिटी की इंचार्ज कुलपति हेमाली देसाई ने कहा कि उन्हें इस मामले में जानकारी मिली है। मुद्दा भी गंभीर है, इसलिए इसे अब एकेडमिक काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा और उसमे चर्चा के बाद कैसे इस समस्या का समाधान लाया जा सकता है इस पर निर्णय लिया जाएगा।

पहले फेल थी ख्याति, रिअसेसमेंट में पास हो गई
ख्याति देवध ने बीकॉम के तीसरे वर्ष की परीक्षा दी थी। अकाउंट में उसे फेल कर दिया गया था। बाद में कॉपी रिअसेसमेंट में 50 प्रतिशत मार्क्स हासिल किया। इसके पहले उसने री-चेकिंग करवाई थी, लेकिन उसमें भी फेल दिखाया गया था। सौरभ पटेल ने कहा कि बीकॉम तीसरे वर्ष के इकोनॉमिक्स में फेल किया गया था। दोबारा जांच में पास हो गया।

प्रोफेसर: कोई जानबूझ कर गलती नहीं करता
प्रोफेसर और सिंडीकेट सदस्य अश्विन पटेल ने कहा कि सबसे बड़ी वजह यह है कि यूनिवर्सिटी के पास इतनी ग्रांट नहीं आती कि इसके लिए अलग से प्रोफेसर रखे जाएंगे। कोई प्रोफेसर जानबूझकर गलतियां नहीं करता फिर भी सुधार करने की आवश्यकता है। दूसरे प्रोफेसर और सिंडीकेट सदस्य मुकेश महिडा के मुताबिक एक दिन में 50 कॉपियां जांचनी होती हैं, कुछ भूल तो हो रही है, जिसमें सुधार जरूरी है।

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